बॉडी लैंग्वेज का अध्ययन कैसे करें

‘बॉडी लैंग्वेज’ को समझना किसी पहेली से कम नहीं। यह एक दक्षता या तकनीक है, जिसे क्रमबद्ध अध्ययन के द्वारा हासिल किया जाता है जो निष्कर्ष, प्रयोग और मापन पर आधारित है। बॉडी लैंग्वेज (शरीर की भाषा) को पढ़ने की योग्यता का अर्थ है कि हम प्रतिदिन की स्थितियों में स्पष्ट दृष्टिगोचर होने वाली चीजों को पढ़ सकें।

इस भाषा का सर्वप्रथम नियम यह है कि अकेले संकेत की कभी व्याख्या न करें, सदैव समूहों का ध्यान रखें और इस बात को सुनिश्चित कर लें कि सभी संकेतों की पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक विभिन्नताओं को ध्यान में रखेंगे। बॉडी लैंग्वेज का अध्ययन करना या पढ़ना असंभव नहीं है। इसके लिए

केवल कुछ मिनट का समय निकालना ही पर्याप्त होगा। यदि आप स्टूडेंट हैं, तो

अपनी स्कूली किताबों के साथ-साथ संकेतों को पढ़ने का भी प्रयत्न करें। यदि

आप स्टूडेंट नहीं हैं, कोई व्यवसायी हैं या किसी नेटवर्किंग कंपनी के साथ जुड़े

हुए हैं, तो आपके लिए बॉडी लँग्वेज सीखने का सबसे अच्छा स्थान, जहां लोगों

का जमघट होता है, होगा। क्लब, होटल, रेस्टोरेंट आदि इसके लिए सबसे उपयुक्त

स्थान हैं, क्योंकि इस प्रकार के स्थानों पर लोग अपने हाव-भाव द्वारा उत्सुकता,

दुख, खुशी, क्रोध, धैर्य और अधैर्य आदि को संकेतों द्वारा अभिव्यक्त करते हैं।

रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, बस स्टॉप, सामाजिक समारोह, पार्टीज, व्यावसायिक बैठकें भी इस भाषा को सीखने के उत्तम स्थान साबित हो सकते हैं। टेलीविजन देखना भी एक अच्छा साधन है। पहले जो मूक फिल्में बना करती थीं, वो देह भाषा सीखने का सर्वश्रेष्ठ साधन थीं। किन्तु अब मूक फिल्में बनती ही नहीं, अतः वही काम आप अपने टेलीविजनों से ले सकते हैं।

आप टेलीविजन की साउण्ड (आवाज) बंद कर दें और केवल फोटो देखकर यह समझने की कोशिश करें कि क्या घटित हो रहा है या कौन-सा

किरदार क्या कह रहा है। आप कितना सही समझ रहे हैं, यह जानने के बोच-बीच में साउण्ड खोलकर भी देखते रहें। इससे आपको संकेत समझने गलती को सुधारने का अवसर भी मिल जाएगा। गूंगे और बहरे बच्चों को इस प्रकार मूक भाषा पढ़ाई और समझाई जाती है।

बॉडी लैंग्वेज यानी शारीरिक भाषा पढ़ने वाले व्यक्ति को हमेशा यह स्मरण रखना चाहिए कि किसी के भी व्यवहार के द्वारा उसके दृष्टिकोण को पढ़ा द सकता है।

शारीरिक भाषा विशेषज्ञों का मत है कि प्रत्येक व्यक्ति के मुंह से निकले। शब्दों का प्रभाव 7 से 10 प्रतिशत, स्वर का प्रभाव 15 से 25 प्रतिशत और शारीरिक भाषा का प्रभाव 60 से 75 प्रतिशत होता है। अतः शारीरिक भाषा का महत्व स्वर और शब्दों से अधिक है। बहुत-सी बातें हम मुंह से नहीं कहते, बल्कि शरीर के संकेतों से व्यक्त कर देते हैं। आपके देखने का ढंग, भावभंगिमा, मुस्कराहट, पोशाक और चाल-ढाल का देखने वाले पर अधिकतम प्रभाव पड़ता है।

हर संकेत एक अकेला शब्द है, जिसके कई अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं। जब आप एक शब्द को अन्य शब्दों के साथ एक वाक्य में रखते हैं, तभी आप पूर्णतया इसका अर्थ समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए सिर खुजाने और पलके झपकाने के कई अर्थ हो सकते हैं।

अधिकांश मूलभूत शारीरिक भाषा के संकेत हर जगह एक से होते हैं। जैसे-जब कोई क्रोधित होता है तो नाक फुला लेता है या भौहें चढ़ा लेता है। जब दुखी होता है तो उसका चेहरा कुछ भावहीन-सा मुरझाया हुआ-सा लगता है और जब प्रसन्न होता है, तो मुस्कराता है।

सिर हिलाने का अर्थ भी हर जगह ‘हो’ या सकारात्मक होता है। बहुत-सी मुस्कराहट जन्मजात होती है। ऐसे बहुत से स्त्री-पुरुष देखने को मिल सकते हैं. जिनके होतों पर हर समय मुस्कराहट खेलती रहती है। न चाहते हुए भी वे मुस्कराते रहते हैं।

एक अन्य उदाहरण के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर अपने हाथ और पैर आपस में गूंथे अर्थात आर-पार करके खड़ा हो, उसकी ढुड्डी नीचे हो और सर्दी का मौसम हो, तो इस बात की अधिक संभावना है कि उसे ठंड लग रही है, न कि यह कि वह सुरक्षात्मक मुद्रा में है। प्रायः ऐसे संकेतों का प्रयोग व्यक्ति उस समय करता है, जब वह टेबल पर किसी के सामने बैठा अपने विचार प्रकट करने का प्रयास कर रहा हो। दूसरे शब्दों में इसका अर्थ यह भी निकाला जा सकता है कि व्यक्ति परिस्थितिवश सुरक्षात्मक या नकारात्मक स्थिति

में है।

मुस्कराहट की महत्ता

जब कोई हिंसक पशु अपने दांत चमकाता है तो उसका भाव काटने का होता है, खाने का होता है। किन्तु जब कोई स्त्री-पुरुष अपने दांत दिखाते हैं, तो उनका भाव मुस्कराने का होता है। मुस्कराने का उद्गम एक तुष्टिकरण संकेत के रूप में हुआ है। आप जितना मुस्कराने का प्रयोग करेंगे, लोग उतनी ही नजदीकी पसंद करेंगे, आपको संपर्क देना चाहेंगे अथवा आपके संपर्क में आना चाहेंगे।

ऐसे लोगों की भी कमी न होगी जो आपकी मुस्कराहट को देखकर, आप आंखों का संपर्क देंगे, आपको स्पर्श करने के लिए प्रेरित होंगे और आपके स लंबे समय तक रहना चाहेंगे। तात्पर्य यह है कि आपके व्यवसाय और व्यक्तिग

जीवन के लिए मुस्कराहट एक बड़े फायदे की चीज है, क्योंकि यह दर्शाती है कि आप धमका नहीं रहे हैं या आप उनके लिए खतरा नहीं है। मुस्कराना अच्छे स्वास्थ्य, अच्छी मानसिकता एवं सुख और समृद्धि का प्रतीक है।

मनुष्य अपने मानस का प्रतिबिंब है। उसकी मानसिक दशा और सफलता में घनिष्ठ संबंध है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा है, प्रसन्नचित्त रहना- मुस्कराना। मुस्कराने की आवश्यकता दैनिक कार्य में भी कम नहीं पड़ती। जिंदगी को आप युद्ध समझें या मजाक, यह आपके हाथ में है। आपके

कर्तव्य की कठोरता आपको अधीर बना सकती है, पर यदि इसका मुकाबला आप

मुस्कराकर करेंगे, तो उसका पालन करना आपको सरल प्रतीत होगा।

व्यक्त करने की क्षमता शब्दों से अधिक हमारे कार्यों में होती है। अपने प्रियतम के मिलने पर हम कब नमस्कार करते हैं? केवल मुस्करा भर देते हैं और जो प्रेम एक मुस्कराहट द्वारा व्यक्त होता है, वह हजारों नमस्कारों द्वारा व्यक्त नहीं हो पाता।

दार्शनिक-सा चेहरा बनाए रहने वालों की अपेक्षा प्रसन्नचित्त के मित्र अधिक होते हैं। मुस्कराने में शायद एक क्षण लगता है, पर उसकी याद किसी को जीवन भर रह सकती है। मुस्कराने में आपका कुछ खर्च नहीं होता, पर जिसे वह मिलती है उसकी खुशी बढ़ जाती है। दैनिक कार्य में जहां भी जिससे मिलिए, मुस्कराते हुए मिलिए।

स्त्रियों के मामले में तो यहां तक कहा जाता है कि मुस्कराहट स्त्रियों का गहना है। शरीर के अन्य अंग उतना काम नहीं करते, जितना कि केवल एक मुस्कराहट कर देती है। वैसे भी आजकल अनेक व्यवसायों में स्त्रियां कार्यरत रहती हैं। अमेरिका जैसे देश में तो नेटवर्किंग व्यवसाय से 60 प्रतिशत स्त्रियां जुड़ी हुई हैं। जब भी कोई स्त्री आपके सामने मुस्कराती है, तो उसकी मुस्कराहट हमेशा कुछ कहती है। क्या कहती है? यह आपके लिए बहुत आवश्यक हो सकता है।

उदाहरण के लिए यदि कोई स्त्री एकटक आपकी ओर देखकर मुस्कराती है, तो इसका अर्थ यह होता है कि वह अपने अंतर्मन से जूझ रही है। यदि उसने सामने वाले की किसी बात पर ऐसा पोज दिया है, तो समझना चाहिए कि वह जानना चाह रही है सामने वाला क्या सोच रहा है, कितना सच और झूठ बोल रहा है। ऐसे में उसकी आंखें भी कुछ कहती, कुछ सोचती प्रतीत होती हैं। यदि आप अपने मन का भेद उस स्त्री पर जाहिर नहीं करना चाहते, तो सावधान हो जाइए, वरना उसकी आंखों का पैनापन और उसकी कातिल मुस्कराहट आपसे बहुत कुछ कहलवा लेगी।

बहुत-सी स्त्रियां उस समय मुस्कराती हैं, जब उनकी तारीफ की जाती है। अपनी तारीफ सुनकर वह हौले-हौले मुस्कराती हैं, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। उनका भाव कुछ ऐसा होता है, जैसे वह न चाहते हुए भी जबरन मुस्कराने की कोशिश कर रही हों। ये स्त्रियां सदा दूसरों का लाभ सोचने वाली और लाभ पहुंचाने वाली होती हैं।

जो स्त्रियां मुस्कराते हुए अपने कंधों को झुका लेती हैं। उन्हें बहुत | अधिक

चतुर व चालाक माना जाता है। इनकी मुस्कराहट बड़ी कातिलाना होती है और आंखें तो सामने वाले के दिल की गहराइयों में उतरकर सब कुछ भांप लेने का काम करती हैं। कोई भी व्यक्ति इनसे अपने दिल की बात नहीं छिपा सकता। व्यावसायिक क्षेत्र में ये बहुत उन्नति करती हैं। दूसरों की कमजोरी का ये पूरा-पूरा लाभ उठाती हैं तथा अपने हाव-भाव से लापरवाही प्रदर्शित करती हैं। इसी प्रकार जो स्त्रियां 19

दाएं-बाएं गरदन को झुकाकर मुस्कराहट बिखेरती हैं, उनसे कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचता। अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ये ऐसा ढंग अपनाती हैं। इनकी हर अदा बनावटी होती है। व्यवसाय आदि में इनसे बचना ही उपयुक्त होगा।

बहुत-सी स्त्रियों की मुस्कराहट और आंखें अपनी अलग-अलग कहानी कहती हैं। इनकी मुस्कराहट तो कातिलाना होती है, किन्तु आंखें कुछ उदास- उदास-सी दीखती हैं। किसी की हानि या दुख से इन्हें कुछ लेना-देना नहीं होता। इनके मन को टटोलने वाला प्रायः असफल रहता है। ये अपने भावों को पूरी तरह छुपाने में कामयाब होती हैं।

उदास चेहरे की मुस्कान एक विवशता दर्शाती है। ये मुस्कान केवल काम निकालने वाली व्यावसायिक होती है। ऐसी स्त्री कभी खुलकर नहीं मुस्करा सकती। प्राय: अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए इस प्रकार की मुस्कान इसके होंठों पर खेलती नजर आती है। व्यवसाय आदि में यह मजबूरी की हालत में कदम रखती है। जो कर रही है, उससे इसे कोई खुशी नहीं होती। संभवतः इसी कारण इसका चेहरा हमेशा उदास-सा दीखता है।

भावपूर्ण एवं सहज मुस्कराहट शर्मीलेपन को दर्शाती है। ऐसी स्त्रियां हर किसी के लिए नहीं मुस्करा सकतीं, बल्कि जिसको पसंद करती हैं, सिर्फ उसी के लिए इनके होंठों पर मुस्कराहट आती है। अनुशासन इन्हें प्रिय होता है। इनका चेहरा भावहीन नहीं होता, ये कभी कोई ऐसी बात नहीं करतीं, जिससे दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचे। अपने काम से काम रखती हैं और मेहनती होती हैं। इस प्रकार के पुरुष भी अनुशासनप्रिय और कमाण्ड करने में सफल सिद्ध होते हैं। मुस्कराहट एक तुष्टिकरण संकेत है, समय पड़ने पर जिसका पूरा-पूरा लाभ उठाया जा सकता है।

मुस्कराहट के साथ-साथ मुद्राओं का भी सर्वाधिक महत्व है। यदि आप व्यवसाय के क्षेत्र से संबंध रखते हैं, तो मुस्कराहट के साथ आपकी शारीरिक मुद्रा भी ऐसी होनी चाहिए जो दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींच ले, अपने प्रति दूसरे को आकर्षित करे और आपसे मिलने या बात सुनने के लिए वह आतुर हो उठे।

अध्ययनकर्ताओं को शरीर की भाषा (बॉडी लैंग्वेज) और मुद्राओं के हर पहलू का अलग-अलग अध्ययन करना चाहिए। यह एक जटिल प्रक्रिया अवश्य है, किन्तु असंभव नहीं।

मुद्राओं का महत्व

यूजेन डिलाक्रोइक्स फ्रांस का एक प्रसिद्ध कलाकार था, तो वेरन जेम्स फ्रांस के धनपतियों में से एक था। एक संध्या में जब वेरन जेम्स पेरिस के एक बड़े होटल में डिनर के लिए आया, तो उसने यूजेन डिलाक्रोइम्स को वहां देखा। उसने यूजेन को अपने साथ डिनर लेने के लिए आमंत्रित किया, जिसे यूजेन ने स्वीकार कर लिया।

डिनर के दौरान वेरन जेम्स महसूस कर रहा था कि उसका मेजबान यूजेन काफी समय से अजीब-अजीब नजरों से उसका चेहरा देखे जा रहा था, मानो वह उस चेहरे में कुछ तलाश करने की कोशिश कर रहा हो। वेरन ने जब उससे उसकी परेशानी की वजह पूछी, तो पहले वह थोड़ा

झिझका, किन्तु फिर साहस बटोरकर सहज भाव से बोला, “मिस्टर वारेन! कृपया

इसे अन्यथा न लें। दरअसल, पिछले काफी दिनों से मैं एक ऐसे मॉडल की तलाश में था, जिसके आधार पर मैं एक भिक्षुक का चित्र बना सकूं और आपका चेहरा देखकर मुझे लग रहा है, जैसे आज मेरी खोज पूरी हो गई है।” उसकी बात को सुनकर पहले तो वारेन सन्न रह गया, पर दूसरे ही क्षण वह

उठाकर हंस पड़ा।

यूजेन की इसमें कोई गलती नहीं थी। वारेन ने पोज ही ऐसा बनाया हुआ था। इससे पता चलता है कि पोज (मुद्रा) हमारी जिंदगी में कितना अहम रोल अदा करता है।

एक शिशु जब तकलीफ में होता है, तो रोता है। एक बालक डंडे को देखकर, पीटे जाने को लेकर पहले ही भयभीत मुद्रा बना लेता है। एक खाली बैठा दुकानदार ग्राहक को देखकर प्रसन्न मुद्रा में आ जाता है। कोई नेता भाषण दे रहा है और श्रोता (सुनने वाला) अपनी कुर्सी में पीछे को टिककर बैठा है। उसने अपने सीने के सामने हाथ बांध लिए हैं, उसके चेहरे से कुछ उलझन भी टपक रही है, और यदि नेता समझदार है तथा उसने श्रोता को मुद्रा बदलते देख लिया है, तो वह समझ जाएगा कि उसकी कही बातें या तो श्रोता को समझ नहीं आ रही हैं या पसंद नहीं आ रहीं। अतः उसे श्रोता में रुचि जगाने के लिए अपनी शैली या विषय में जरूर बदलाव लाना होगा। इस प्रकार व्यक्ति जुबान से एक शब्द भी बोले बिना अपनी मुद्रा से बहुत कुछ कह जाता है।

कुछ मुद्राएं आराम के लिहाज से खुद-ब-खुद बन जाती हैं। यह ऐसा ही है, जैसे कोई व्यक्ति बहुत देर तक दोनों पैरों पर सीधा खड़ा नहीं रह सकता। वह पहलू बदलता है या किसी खंभे का सहारा लेता है या दोनों कूल्हों पर हाथ रख लेता है या टेढ़ा होकर किसी मेज आदि से टिक जाता है। इस तरह की कुछ मुद्राएं आदत में शुमार हो जाती हैं।

मुद्रा का विश्लेषण करते हुए इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए कि केवल किसी एक मुद्रा को देखकर नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए, बल्कि कुछ दूसरी मुद्राओं पर भी ध्यान देकर उसका नतीजा निकालना चाहिए। उदाहरण के लिए पचास अंकों के एक पेपर में दस प्रश्न दिए गए हैं। अब कोई एक प्रश्न सही हल करता है, तो उससे मिले अंक उसे पास नहीं करेंगे, क्योंकि पास होने के लिए कम-से-कम एक तिहाई यानी सत्रह अंक तो चाहिए ही, इसलिए उसे सभी प्रश्न करने होंगे। इस तरह मनुष्य की एक मुद्रा ही नहीं, बल्कि उसकी साथी मुद्राओं का भी अध्ययन करना चाहिए, तभी किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।

यदि कोई बीमा एजेंट आपके पास आया है और आपसे चाहता है कि आप उससे पॉलिसी खरीद लें। इसके लिए वह आपको पॉलिसी के फायदे भी समझा


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